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Success Story : जिनका बचपन संघर्षों में गुजरा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी,जिस कॉलेज से की बीए और एमए आज उसी के है प्राचार्य

Success Story : जिनका बचपन संघर्षों में गुजरा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी,जिस कॉलेज से की बीए और एमए आज उसी के है प्राचार्य

रिपोर्ट : ललितेश कुशवाहा

भरतपुर.यदि आप मेहनत करते हैं तो आपको आगे बढ़ने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती.ऐसे कुछ लोग है जो विपरीत से विपरीत परिस्थति में भी अपनी मंजिल को हासिल कर ही लेते है.आज हम आपको एक ऐसे शख्स की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिनका बचपन संघर्षों में गुजरा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज जिस महाविधालय से बीए और एमए की उसी के प्राचार्य है.उन्होंने बताया कि उनके पिता किसान थे जो उनको बढ़ाने की बजाय किसान ही बनाना चाहते थे. लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था गांव के सरकारी विद्यालय से उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की उसके बाद 11 वी के साथ साथ ग्रेजुएशन व मास्टर डिग्री भरतपुर से की. वह प्रत्येक क्लास के टॉपर की श्रेणी में रहे. मास्टर डिग्री भूगोल में उन्हें गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे. उनकी शादी 7 वर्ष की आयु में ही भाई के साथ हो गई थी. गांव से प्रतिदिन भरतपुर पढ़ने के लिए साइकिल से आना और जाना .80 के दशक में डीजल की किल्लत के चलते कही घंटे लाइन में लगकर पर्ची लेना उसके बाद पढ़कर डीजल लेकर गांव जाना.इन्ही संघर्षों के बीच उन्होंने पढ़ाई की और सन 1995 में उन्होंने आरपीएससी परीक्षा को परीक्षा को उत्तीर्ण कर कॉलेज लेक्चरर की नौकरी प्राप्त की.

10 वी बोर्ड में राजस्थान में 5 वी मैरिट,फिर पढ़ाई करने से नही रोका..

ओमप्रकाश सोलंकी ने बताया कि उनका जन्म भरतपुर जिले की कुम्हेर तहसील के गांव अजान में 7 जुलाई 1965 में हुआ था. उन्होंने बताया कि उनके पिता किसान थे और हमेशा हमें भी खेती करने की सलाह देते थे. उनका मानना था कि उन्हें खेती के लिए मजदूर लगाने पड़ते हैं इसलिए वह भी हमें इसी कार्य में लगाना चाहते थे. गांव के सरकारी विद्यालय से उन्होंने पांचवी तक पढ़ाई की .उसके बाद पिताजी उनको पढ़ाना नहीं चाहते थे लेकिन गांव का विद्यालय आठवीं तक क्रमोन्नत हो गया मैं छोटा था इसलिए पिताजी ने आठवीं तक पढ़ाई करने से नही रोका. उसके बाद विद्यालय दसवीं तक क्रमोन्नत हो गया तो मैंने 10वीं तक पढ़ाई कर ली .10 वी की पढ़ाई के दौरान बड़ा भाई बीमार हो गया. पिताजी के साथ खेती में हाथ बटवाने लगा.लेकिन इसके बाबजूद भी कक्षा 10वीं में राजस्थान में पांचवा स्थान प्राप्त किया था.इसके बाद पिता जी ने पढ़ाई करने से नही रोका.हालांकि कक्षा दो में पढ़ाई के दौरान सात वर्ष की आयु में बड़े भाई के साथ शादी भी हो चुकी थी.

1980 में डीजल की किल्लत के चलते लगते थे लाइन में..

उन्होंने बताया की 11 वी क्लास में भरतपुर के मल्टी पर्पज विद्यालय में एडमिशन लिया. उन्होंने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ खेती करने भी करने लगा था. गांव से प्रतिदिन साइकिल से आना और जाना .उन्होंने बताया कि सन 1980 में डीजल की किल्लत थी पहले घंटों डीजल की पर्ची के लिए लाइन में लगना उसके बाद में पढ़ाई करना और उसके बाद गांव में डीजल लेकर पहुंचना. इन संघर्ष के बीच पढ़ाई करते हुए 11 वी क्लास के परिणाम में राजस्थान में 6 वी रेंक हासिल की थी.

जिस कॉलेज से बीए और एमए किया उसी में है प्राचार्य…

उन्होंने बताया कि ग्रेजुएशन के लिए वर्ष 1984 में भरतपुर की महारानी श्री जया महाविद्यालय में एडमिशन लिया.उसके बाद मास्टर डिग्री इंग्लिश और ज्योग्राफी से की .ज्योग्राफी में गोल्डमेडलिस्ट रहे. एमफिल राजस्थान विश्वविद्यालय से की. नेट सेट क्वालीफाई कर सन 1995 में आरपीएससी भर्ती में कॉलेज लेक्चरर की नौकरी प्राप्त की.राजकीय महाविद्यालय प्रतापगढ़ में 10 जुलाई 1995 से 1 दिसंबर 1998 तक और इसके बाद भरतपुर के डीग में स्थित मास्टर आदित्येन्द्र जी राजकीय महाविद्यालय डीग में दिसंबर 1998 से 13 मार्च 1999 तक , इसके बाद भरतपुर स्थित महारानी श्री जया महाविद्यालय में भूगोल विभाग में प्रोफेसर के रूप में अपनी सेवाएं दी. इसी महाविधालय में 12 नवंबर 2022 को उन्होंने प्रिंसिपल के रूप में ज्वाइन किया है.जिस कॉलेज से बीए और एमए की उसी में आज प्राचार्य है.