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ईद-उल-अजहा आज,बकरीद में क्यों दी जाती है कुर्बानी जानिए !

ईद-उल-अजहा आज,बकरीद में क्यों दी जाती है कुर्बानी जानिए !
ईद-उल-अजहा आज,बकरीद में क्यों दी जाती है कुर्बानी जानिए !
भरतपुर – ईद-उल-अजह यानी बकरीद पर मुस्लिम समाज के कुर्बानी देते हैं. ये पर्व इस्लाम धर्म में बलिदान का प्रतीक माना जाता है.बकरा ईद का मतलब अर्थ होता है कुर्बानी, मुस्लिम समुदाय के लिए ईद उल अजहा एक प्रमुख त्यौहार है। रमाजन रोजा रखने के एक महीने के बाद लगभग 70 दिन बाद बकरा ईद का त्यौहार मनाया जाता है। बकरा ईद का इतिहास, इस्लाम के अनुसार काफी पुराना है।
इस्लाम के मान्यता के अनुसार अल्लाह पाक ने हज़रत इब्राहिम अलैहि अस्सलाम को एक ख़्वाब दिखाया। जिसमें कुर्बानी, अपने सबसे प्यारी/नजदीक जो है उसकी करनी थी। ऐसे में बहुत सोचने के बाद हज़रत इब्राहिम सलाम अपने पुत्र/बेटे की हज़रत इस्माइल सलाम की कुर्बानी देने का फैसला करते है। जब बेटे की कुर्बानी हजरत इब्राहिम सलाम दे रहे थे। आँख पर कपडा बाँधा गया था, क्योकि कोई भी पिता अपने बेटे को कुर्बान नहीं कर सकता है, इसलिए आँख पर कपड़ा बाँध कर कुर्बानी दी गई।
जब आँख खोल कर देगा गया तो बेटे की जगह जुब्बा यानी भेड़ की कुर्बानी हुई थी। यह अल्लाह पाक का चमत्कार था। इसी रीति रिवाज को इस्लाम के मानने वाले आज भी मनाते है. बकरा ईद में बकर एक अरबी शब्द है । कुर्बानी का अर्थ मतलब जानवर के जिबह अर्थात कुर्बान करना होता है। देश में “बकरा ईद” के नाम से जाना जाता है भारत में बकरे की कुर्बानी दी जाती है.